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सभी बहुजन समझ लिजिए 100 % आरक्षण आबादी के हिसाब से जबतक नहीं होगी तबतक मनुवादी वर्चस्व चलता रहेगा !मनुवादी के बातों में आकर आपस में मत लड़िए ये हमें खुद में उलझाए रखना चाहते है ताकि इनका वर्चस्व बना रहे !कोटा within कोटा से कुछ नहीं होगी ,ये लाकर हमे खुद में बांटना चाहते है !
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बिहार के कटिहार में सैजल ठाकुर ने अजय पासवान से शादी कर ली, सैजल के पिता ने उसको मृत मानकर पिंड दान कर दिया,
सैजल ने कहा वो अजय पासवान से 11 साल से रिलेशनशिप में है और पिता को बताया था कि शादी करवा दो, लेकिन उन्होंने जाति के चलते मना कर दिया था,
यह शूरवीर लोग मुगलों को बेटी युवक से शादी पर इनका खून खौल जाता है,
खैर दोंनों को बहुत बहुत बधाई, मनुवादी व्यवस्था को तोड़ते इस जोड़े को क्रांतिकारी जय भीम।
सैजल ने कहा वो अजय पासवान से 11 साल से रिलेशनशिप में है और पिता को बताया था कि शादी करवा दो, लेकिन उन्होंने जाति के चलते मना कर दिया था,
यह शूरवीर लोग मुगलों को बेटी युवक से शादी पर इनका खून खौल जाता है,
खैर दोंनों को बहुत बहुत बधाई, मनुवादी व्यवस्था को तोड़ते इस जोड़े को क्रांतिकारी जय भीम।
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साज़िशों की जितनी भी पटकथाएँ लिख लो, जनता तुम्हारे हर देश विरोधी मंसूबे को ध्वस्त कर देगी।
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इस देश में जितने सत्याग्रह आज़ादी के लिए नहीं हुए, उससे ज़्यादा आंदोलन और सत्याग्रह सिर्फ़ मंदिर में प्रवेश को लेकर हुए है। कभी सुना है, एक धर्म के दूसरे समुदाय को आंदोलन करने पड़े, क़ानून लाने पड़े अपने ही धार्मिक आराध्य के दर्शन करने के लिए।
काकी जी, पूरे देश में 50 से ज़्यादा लिखित रिकॉर्ड में आंदोलन है जो सिर्फ़ मंदिर प्रवेश के लिए हुए।
और ये काकी बोल रहीं है, कुछ सुना नहीं और कुछ देखा नहीं और कुछ पता नहीं….🤷♂️
अरे जब ऐसा नहीं था United Provinces Removal of Social Disabilities Act, 1947 ये क्यों लाना पड़ा था सरकार को ? मतलब धूर्तता की सीमा होती है एक …
मैं कुछ आंदोलन और सत्याग्रह बता रहा है, इसके अलावा बहुत सारे है। 👇
वायकोम सत्याग्रह - केरल में दलितों को मंदिर में प्रवेश को लेकर आंदोलन, वहाँ के मंदिर के आसपास के रास्ते में भी दलितों को चलने का अधिकार नहीं था। इस आंदोलन को महात्मा गांधी ने भी समर्थन किया।
अंबादेवी मंदिर सत्याग्रह- महाराष्ट्र ने मंदिर प्रवेश को लेकर बड़ा आंदोलन, डॉ अंबेडकर प्रेरणा स्त्रोत और प्रमुख नेता इसके पंजाब राव देशमुख।
मदुरै मीनाक्षी मंदिर प्रवेश- दलितों और नादर समुदाय के लोगों को मीनाक्षी मंदिर में प्रवेश कराया गया। मद्रास प्रेसीडेंसी में बड़ा सफलतापूर्ण कदम माना गया।
नाथद्वारा श्रीनाथजी मंदिर 1988- मंदिर की दीवार पर लिखा था “शूद्रों एवं विधर्मियों का प्रवेश वर्जित है”। कैलाश सत्यार्थी (नोबेल शांति पुरस्कार विजेता), स्वामी अग्निवेश और हरिजन कार्यकर्ता हजारीलाल जाटौलिया। 2 अक्टूबर 1988 (गांधी जयंती) को लगभग 30 दलितों का जत्था लेकर मंदिर में प्रवेश किया। पंडों ने हमला किया, लेकिन प्रवेश हो गया और मनाही की परंपरा टूटी।
काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश), 1954- स्वतंत्रता के बाद United Provinces Removal of Social Disabilities Act, 1947 के बावजूद दलितों को मुख्य द्वार से प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। वे एक छोटी खिड़की से दर्शन कर सकते थे। 17 फरवरी 1954 को बेचन राम (कांग्रेस विधायक) के नेतृत्व में हरिजनों ने जुलूस निकालकर मुख्य द्वार से प्रवेश का प्रयास किया।
वैद्यनाथ मंदिर - सितंबर 1953 को जब विनोबा भावे कुछ हरिजनों और साथियों के साथ मंदिर में प्रवेश करने लगे, तो दूसरे पंडों ने उन पर लाठियों और जूतों से हमला कर दिया। “धर्म की जय” के नारे लगाए गए। ये सबसे बड़ी घटना बनी और पूरी दुनिया में पंडों की थू हुई, इसके बाद भी तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री बाबू को भारी पुलिस और मंत्रियों को लेकर प्रवेश करवाना पड़ा।
काकी जी, पूरे देश में 50 से ज़्यादा लिखित रिकॉर्ड में आंदोलन है जो सिर्फ़ मंदिर प्रवेश के लिए हुए।
और ये काकी बोल रहीं है, कुछ सुना नहीं और कुछ देखा नहीं और कुछ पता नहीं….🤷♂️
अरे जब ऐसा नहीं था United Provinces Removal of Social Disabilities Act, 1947 ये क्यों लाना पड़ा था सरकार को ? मतलब धूर्तता की सीमा होती है एक …
मैं कुछ आंदोलन और सत्याग्रह बता रहा है, इसके अलावा बहुत सारे है। 👇
वायकोम सत्याग्रह - केरल में दलितों को मंदिर में प्रवेश को लेकर आंदोलन, वहाँ के मंदिर के आसपास के रास्ते में भी दलितों को चलने का अधिकार नहीं था। इस आंदोलन को महात्मा गांधी ने भी समर्थन किया।
अंबादेवी मंदिर सत्याग्रह- महाराष्ट्र ने मंदिर प्रवेश को लेकर बड़ा आंदोलन, डॉ अंबेडकर प्रेरणा स्त्रोत और प्रमुख नेता इसके पंजाब राव देशमुख।
मदुरै मीनाक्षी मंदिर प्रवेश- दलितों और नादर समुदाय के लोगों को मीनाक्षी मंदिर में प्रवेश कराया गया। मद्रास प्रेसीडेंसी में बड़ा सफलतापूर्ण कदम माना गया।
नाथद्वारा श्रीनाथजी मंदिर 1988- मंदिर की दीवार पर लिखा था “शूद्रों एवं विधर्मियों का प्रवेश वर्जित है”। कैलाश सत्यार्थी (नोबेल शांति पुरस्कार विजेता), स्वामी अग्निवेश और हरिजन कार्यकर्ता हजारीलाल जाटौलिया। 2 अक्टूबर 1988 (गांधी जयंती) को लगभग 30 दलितों का जत्था लेकर मंदिर में प्रवेश किया। पंडों ने हमला किया, लेकिन प्रवेश हो गया और मनाही की परंपरा टूटी।
काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश), 1954- स्वतंत्रता के बाद United Provinces Removal of Social Disabilities Act, 1947 के बावजूद दलितों को मुख्य द्वार से प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। वे एक छोटी खिड़की से दर्शन कर सकते थे। 17 फरवरी 1954 को बेचन राम (कांग्रेस विधायक) के नेतृत्व में हरिजनों ने जुलूस निकालकर मुख्य द्वार से प्रवेश का प्रयास किया।
वैद्यनाथ मंदिर - सितंबर 1953 को जब विनोबा भावे कुछ हरिजनों और साथियों के साथ मंदिर में प्रवेश करने लगे, तो दूसरे पंडों ने उन पर लाठियों और जूतों से हमला कर दिया। “धर्म की जय” के नारे लगाए गए। ये सबसे बड़ी घटना बनी और पूरी दुनिया में पंडों की थू हुई, इसके बाद भी तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री बाबू को भारी पुलिस और मंत्रियों को लेकर प्रवेश करवाना पड़ा।
लाखों-करोड़ों लेकर कथा कहने वाले कथावाचक जो जनजागरण नहीं कर पा रहे, वो कार्य 75 साल से अधिक उम्र में विदुषी आचार्या डॉ. पुष्पा दीक्षित जी कर रहीं। यह मेरी अज्ञानता थी कि आपके बारे में पहले मुझे जानकारी नहीं थी। इधर, फ़ेसबुक पर कुछ वीडियो पर दृष्टि पड़ी तो प्रभावित हुआ। सर्च करने नी शोध संस्थान की अध्यक्ष हैं।आपने 40 वर्षों के तप से ‘पाणिनीय अष्टाध्यायी’ के प्रक्रियाविज्ञान को स्पष्ट करने वाली एक सर्वथा नवीन गणितीय विधि आविष्कृत की है। अभी तक 3500 वर्षों में पाणिनि को किसी ने इस प्रकार व्याख्यात नहीं किया है। इस प्रक्रिया का नाम पौष्पी प्रक्रिया है। इसका आश्रय लेकर जो पचास से अधिक ग्रन्थ लिखे गये हैं।
प्राचीन ग्रंथों के उदाहरणों के साथ सनातन के खिलाफ तमाम दुष्प्रचारों का आप खंडन करने में जुटीं हैं। अभी इनके पेज पर फ़ॉलोवर्स ज्यादा नहीं हैं, लेकिन वीडियो खूब देखे जा रहे।
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रुदौली में दलित परिवार पर कथित हमला! आखिर कब तक दलितों पर अत्याचार होता रहेगा?
📍 स्थान: जलालपुर गांव, विधानसभा रुदौली
उत्तर प्रदेश के रुदौली विधानसभा क्षेत्र के जलालपुर गांव से दलित परिवार के साथ मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि विधायक रुदौली के करीबी लोगों ने े पीटा और परिवार की हालत खराब कर दी।
सवाल सत्ता से है—क्या गरीब और दलित परिवारों को सम्मान से जीने का अधिकार नहीं है? क्या रसूखदार लोगों को कानून अपने हाथ में लेने की छूट मिल गई है?
अब अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद होगी!
भीम आर्मी एवं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।
हम सरकार और जिला प्रशासन से मांग करते हैं कि:
मामले की तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जाए।
आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्याय मिले।
किसी भी राजनीतिक दबाव में दोषियों को बचाया न जाए।
यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय और अत्याचार के खिलाफ है!
याद रखिए—दलितों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। संविधान ने हमें अधिकार दिए हैं और हम उन अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करते रहेंगे।
भीम आर्मी | आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम)
पीड़ित परिवार अकेला नहीं है—हम न्याय की इस लड़ाई में उसके साथ खड़े हैं!
पोस्ट को इतना शेयर करो कि पीड़ित परिवार की आवाज सरकार और प्रशासन तक पहुंचे!
जय भीम! जय संविधान!
@BhimArmyChief @VinayRatanSingh @ASP4UP @BhimArmy_BEM
📍 स्थान: जलालपुर गांव, विधानसभा रुदौली
उत्तर प्रदेश के रुदौली विधानसभा क्षेत्र के जलालपुर गांव से दलित परिवार के साथ मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि विधायक रुदौली के करीबी लोगों ने े पीटा और परिवार की हालत खराब कर दी।
सवाल सत्ता से है—क्या गरीब और दलित परिवारों को सम्मान से जीने का अधिकार नहीं है? क्या रसूखदार लोगों को कानून अपने हाथ में लेने की छूट मिल गई है?
अब अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद होगी!
भीम आर्मी एवं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।
हम सरकार और जिला प्रशासन से मांग करते हैं कि:
मामले की तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जाए।
आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्याय मिले।
किसी भी राजनीतिक दबाव में दोषियों को बचाया न जाए।
यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय और अत्याचार के खिलाफ है!
याद रखिए—दलितों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। संविधान ने हमें अधिकार दिए हैं और हम उन अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करते रहेंगे।
भीम आर्मी | आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम)
पीड़ित परिवार अकेला नहीं है—हम न्याय की इस लड़ाई में उसके साथ खड़े हैं!
पोस्ट को इतना शेयर करो कि पीड़ित परिवार की आवाज सरकार और प्रशासन तक पहुंचे!
जय भीम! जय संविधान!
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यहां यह पंडा धीरेंद्र शास्त्री शुद्ध रूप से यदुवंशियों को टारगेट कर रहा है, खैर हमें क्या यादव लोग जाने,
ऐसी टिप्पणी बाबासाहेब अंबेडकर पर कर देता तो, इसको इसके प्रभु से मिलवा देते,
इसके हिंदुराष्ट्र की यात्रा में यादव लोग सबसे आगे रहते हैं। 😂😂
ऐसी टिप्पणी बाबासाहेब अंबेडकर पर कर देता तो, इसको इसके प्रभु से मिलवा देते,
इसके हिंदुराष्ट्र की यात्रा में यादव लोग सबसे आगे रहते हैं। 😂😂
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NEW | In an informal survey conducted by IIT Bombay’s SC/ST Students’ Cell, 93 per cent of the respondents said that they faced caste discrimination but did not report the incidents to the cell.
Greeshma Kuthar (@jeegujja) spotlights Amey Tirodkar’s (@ameytirodkar) coverage on the Cell.
Watch the full video:
youtube.com/watch?v=gLe3_Y…
Read the full story:
frontline.thehindu.com/social-issues/…
Greeshma Kuthar (@jeegujja) spotlights Amey Tirodkar’s (@ameytirodkar) coverage on the Cell.
Watch the full video:
youtube.com/watch?v=gLe3_Y…
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frontline.thehindu.com/social-issues/…
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शामली में ब्राह्मणभोज बंद कर दिया गया, 🔥🔥
मनुवादियों ने ऐसी प्रथा बनाई कि मरने के बाद भी परिवार को ब्राह्मण भोज करवाना पड़ता था, लेकिन शामली में मृत्यभोज की जगह गांव वालों और परिजनों ने क्षमता अनुसार शोकाकुल परिवार को आर्थिक मदद दी,
यह बेहतरीन कदम है, मृत्यभोज ब्रह्मभोज एक र पर ज़ुल्म है, आज भी कई परिवार जमीन बेचकर, कर्जा लेकर मृत्युभोज करवाते हैं,
मरने के बाद भोज तो सिर्फ़ गिद्ध करते हैं, यह गिद्ध प्रथा बंद होना ही चाहिए सरकार को क़ानून लाना चाहिए, इसे ख़त्म करने के लिए ।
मनुवादियों ने ऐसी प्रथा बनाई कि मरने के बाद भी परिवार को ब्राह्मण भोज करवाना पड़ता था, लेकिन शामली में मृत्यभोज की जगह गांव वालों और परिजनों ने क्षमता अनुसार शोकाकुल परिवार को आर्थिक मदद दी,
यह बेहतरीन कदम है, मृत्यभोज ब्रह्मभोज एक र पर ज़ुल्म है, आज भी कई परिवार जमीन बेचकर, कर्जा लेकर मृत्युभोज करवाते हैं,
मरने के बाद भोज तो सिर्फ़ गिद्ध करते हैं, यह गिद्ध प्रथा बंद होना ही चाहिए सरकार को क़ानून लाना चाहिए, इसे ख़त्म करने के लिए ।
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Tragic incident in Telangana: 🚨⚠️
Rahul Kamble, a Dalit youth, died by suicide after facing CASTE-BASED harassment and humiliation by doctors in Adilabad.
His suicide note mentions that the police also humiliated & assaulted him. Terrifying!
Rahul Kamble, a Dalit youth, died by suicide after facing CASTE-BASED harassment and humiliation by doctors in Adilabad.
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इस जातिवादी न्यायिक प्रक्रिया में एससी,एसटी, ओबीसी को कभी न्याय मिल ही नहीं सकता। बहुजनों को न्याय सिर्फ बहुजन ही दे सकता है।
#कॉलेजियम_समाप्त_करो
#कॉलेजियम_समाप्त_करो
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RT @raviparmarIN: हरियाण और आंध्रप्रदेश की घटना ने अंदर तक झकझोर दिया, मानो मानव सभ्यता दम तोड़ रही है,
हरियाण में स्कूल के अंदर एक तीसरी…
हरियाण में स्कूल के अंदर एक तीसरी…
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भारत के संविधान को हम बिल्कुल नहीं मानते हैं हम मनुस्मृति के संविधान को मानते हैं। क्यों भाई? मनु-स्मृति के संविधान के कारण देश हजारों साल गुलाम रहा। गुलामी पसंद है लेकिन हम एससी एसटी ओबीसी को कोई अधिकार नहीं देना चाहते।उनका आरक्षण छीन लिया जाये और उनकी शिक्षा पर प्रतिबंध लगा अर्जित की है ब्राह्मणों को आदेश दिया जाये कि एससी एसटी ओबीसी की संपत्ति जबरन छीनकर फिर गुलाम बना दिया जाये। हथियार छीन लिया जाये ताकि कोई विद्रोह न कर सकें।
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Anish Kumar retweeted
Due to their caste, the teacher refused to let Dalit children sit and study in class. 💔
Dalit kids were thrown out of the class because upper-caste children refused to share the class with Dalit children, and the teacher also refused to teach Dalit kids.
Savarnas push to scrap caste discrimination and atrocities, which savarna perpetuate.
Dalit kids were thrown out of the class because upper-caste children refused to share the class with Dalit children, and the teacher also refused to teach Dalit kids.
Savarnas push to scrap caste discrimination and atrocities, which savarna perpetuate.
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ब्राह्मण वैज्ञानिक अनिल तिवारी कह रहा है महिलाओं को दंडवत नहीं लेटना चाहिए क्योंकि स्तनो के भार से धरती डगमगाने लगती है, 😂😂
पूरी दुनिया में भूकंप का कारण स्त्रियों के स्तन का भार है, गज़ब के लॉजिक लाते हैं यह मनु के बच्चे।
पूरी दुनिया में भूकंप का कारण स्त्रियों के स्तन का भार है, गज़ब के लॉजिक लाते हैं यह मनु के बच्चे।
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Anish Kumar retweeted
कैसी होती वो दुनिया अगर स्त्री ने बनाई होती?
- मेरी कविता
करवा चौथ करने वाली स्त्रियों के लिए मेरी कविता,
धर्म और पितृसत्ता एक दूसरे के पूरक हैं।
#karwachauth #करवाचौथ #religion #patriarchy
- मेरी कविता
करवा चौथ करने वाली स्त्रियों के लिए मेरी कविता,
धर्म और पितृसत्ता एक दूसरे के पूरक हैं।
#karwachauth #करवाचौथ #religion #patriarchy
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रामदेव, आपकी सोच में मनुस्मृति की वर्ण व्यवस्था का महिमामंडन साफ दिखाई देता है, जिसमें शूद्रों को सिर्फ गुलामी करना बताया गया, 5 हजार सालों से शोषण की दस्ताना को ये दौ कौड़ी का पाखण्डी हमारी युवा पीढ़ी को गुलामी करने का पाठ पढ़ा रहा है।
मनुस्मृति की वर्णवादी सोच ने शूद्रों (OBC भाव और गुलामी में जकड़े रखने का काम किया।
आज का बहुजन समाज किसी की बनाई ऊँच-नीच की सीढ़ी पर जीने को तैयार नहीं है।
हमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र के खाँचों में बाँटने वाली नहीं, बल्कि समानता और संविधान की बात चाहिए!
ढोंगी रामदेव याद रख-
अब बहुजन समाज गुलाम नहीं, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है। हमें वर्ण व्यवस्था नहीं, बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर का संविधान चाहिए!
मनुस्मृति की वर्णवादी सोच ने शूद्रों (OBC भाव और गुलामी में जकड़े रखने का काम किया।
आज का बहुजन समाज किसी की बनाई ऊँच-नीच की सीढ़ी पर जीने को तैयार नहीं है।
हमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र के खाँचों में बाँटने वाली नहीं, बल्कि समानता और संविधान की बात चाहिए!
ढोंगी रामदेव याद रख-
अब बहुजन समाज गुलाम नहीं, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है। हमें वर्ण व्यवस्था नहीं, बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर का संविधान चाहिए!
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📍 Hyderabad | All India OBC Strategic Meeting in Progress ✊
📢 Caste Census with OBC Column — Our Right, Our Demand!
#OBC #CasteCensus #OurRightOurDemand #OBCUnity #Hyderabad
@gowdkiran @obcrights_org @suraj_yadav2005
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@gowdkiran @obcrights_org @suraj_yadav2005
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Revolutionary vibe in Indian Courts!
Impact of word -' judicial servant ' on the psyche of Indian people & advocates,
मैं इस मैटर में वकीलों के पक्ष का पूर्ण समर्थन करता हूं, आजकल के जज वकीलों को ही इज्जत देने को तैयार नहीं हैं, उन्हीं की सुनने को तैयार नहीं हैं, तो आम जनता की क्याीय न्यायपालिका की भ्रष्ट जजों से आजादी चाहते हैं, और ये हम लेकर रहेंगे!
#prabalpratap #judicialservant
Impact of word -' judicial servant ' on the psyche of Indian people & advocates,
मैं इस मैटर में वकीलों के पक्ष का पूर्ण समर्थन करता हूं, आजकल के जज वकीलों को ही इज्जत देने को तैयार नहीं हैं, उन्हीं की सुनने को तैयार नहीं हैं, तो आम जनता की क्याीय न्यायपालिका की भ्रष्ट जजों से आजादी चाहते हैं, और ये हम लेकर रहेंगे!
#prabalpratap #judicialservant
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हे मेरे बहुजन समाज के लोगों. क्या आप लोग सो रहे हैं या जाग रहे हैं. कुछ कहना चाहता हूँ, सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम की बात बताना चाहता हूँ.
सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम ने 4 हाइकोर्ट में चीफ जस्टिस और 9 जजों की नियुक्ति की सिफारिश की है.
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के लिए 4 नाम.
1. जस्टिस मनाश रंजन पाठक : गुजरात HC
2. जस्टिस पी सैम कोशी : दिल्ली HC
3. जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती : तेलंगाना HC
4. जस्टिस सुधीर सिंह : उत्तराखंड HC
बॉम्बे हाईकोर्ट में जज बनाने के लिए वकील अजय शर्मा और अधिवक्ता वैभव सुगदरे के नाम की सिफारिश है.
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में इन 7 वकीलों के नाम की सिफारिश कोलेजियम ने है.
1. डॉ विवेक शरण
2. राजेश कुमार शुक्ल
3. कनक लता सिंह
4. भक्ति व्यस
5. श्रेयस पंडित
6. मृणाल मजूमदार
7. अविनाश जरगर
मुझे नही लगता इन नामों में कोई OBC SC ST है, अगर होगा भी तो एक या दो होंगे या नही भी. न्यायालय में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए.
साल 2000 में कोलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने के लिए नामों की सिफारिश की थी. तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायण ने यह कहते हुए सिफारिश को वापस कर दिया की इसमें एक भी दलित या आदिवासी जज नही है. तब केजी बालाकृष्णन को जज बनाया गया जो आगे चलकर CJI बने.
महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी को साइन नही करना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम ने 4 हाइकोर्ट में चीफ जस्टिस और 9 जजों की नियुक्ति की सिफारिश की है.
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के लिए 4 नाम.
1. जस्टिस मनाश रंजन पाठक : गुजरात HC
2. जस्टिस पी सैम कोशी : दिल्ली HC
3. जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती : तेलंगाना HC
4. जस्टिस सुधीर सिंह : उत्तराखंड HC
बॉम्बे हाईकोर्ट में जज बनाने के लिए वकील अजय शर्मा और अधिवक्ता वैभव सुगदरे के नाम की सिफारिश है.
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में इन 7 वकीलों के नाम की सिफारिश कोलेजियम ने है.
1. डॉ विवेक शरण
2. राजेश कुमार शुक्ल
3. कनक लता सिंह
4. भक्ति व्यस
5. श्रेयस पंडित
6. मृणाल मजूमदार
7. अविनाश जरगर
मुझे नही लगता इन नामों में कोई OBC SC ST है, अगर होगा भी तो एक या दो होंगे या नही भी. न्यायालय में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए.
साल 2000 में कोलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने के लिए नामों की सिफारिश की थी. तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायण ने यह कहते हुए सिफारिश को वापस कर दिया की इसमें एक भी दलित या आदिवासी जज नही है. तब केजी बालाकृष्णन को जज बनाया गया जो आगे चलकर CJI बने.
महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी को साइन नही करना चाहिए.
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😂 सुदामा कोटा का कमाल देखिए! OBC स्कॉलरशिप का कथित देसी जुगाड़!
30 छात्रों के OBC सर्टिफिकेट और ₹10 करोड़ की विदेशी स्कॉलरशिप का दावा—जांच हो, सच सामने आए!
इधर OBC बच्चे फीस के लिए परेशान, उधर ब्राह्मण-ठाकुर सहित कथित लाभार्थियों के नामों पर सवाल! 🤔
हमारे OBC–SC–ST भाई राम ड़ यात्रा में व्यस्त… लेकिन अपने बच्चों की स्कॉलरशिप का हिसाब कौन पूछेगा? 😂
कृष्णा गौर जी, लाभार्थियों की सूची, जाति प्रमाणपत्रों का सत्यापन और ₹10 करोड़ का हिसाब सार्वजनिक कीजिए!
आस्था भी रखेंगे, अधिकार भी मांगेंगे! 😜
#OBC #SCST #छात्रवृत्ति
30 छात्रों के OBC सर्टिफिकेट और ₹10 करोड़ की विदेशी स्कॉलरशिप का दावा—जांच हो, सच सामने आए!
इधर OBC बच्चे फीस के लिए परेशान, उधर ब्राह्मण-ठाकुर सहित कथित लाभार्थियों के नामों पर सवाल! 🤔
हमारे OBC–SC–ST भाई राम ड़ यात्रा में व्यस्त… लेकिन अपने बच्चों की स्कॉलरशिप का हिसाब कौन पूछेगा? 😂
कृष्णा गौर जी, लाभार्थियों की सूची, जाति प्रमाणपत्रों का सत्यापन और ₹10 करोड़ का हिसाब सार्वजनिक कीजिए!
आस्था भी रखेंगे, अधिकार भी मांगेंगे! 😜
#OBC #SCST #छात्रवृत्ति
"MPOM" पोर्टल का शुभारंभ...
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